भारत में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए हर साल 10 फरवरी को National Deworming Day 2026 (राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस) मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को पेट के कीड़ों (Soil-Transmitted Helminths) से मुक्त करना है। कृमि संक्रमण न केवल बच्चों के शारीरिक विकास को रोकता है, बल्कि यह उनकी मानसिक एकाग्रता और हीमोग्लोबिन स्तर पर भी बुरा असर डालता है।
आइए जानते हैं कि यह संक्रमण आखिर फैलता कैसे है और हम इससे अपने परिवार को कैसे बचा सकते हैं।
क्या हैं कृमि संक्रमण के लक्षण
National Deworming Day भारत सरकार द्वारा फरवरी 2015 से चलाया जा रहा एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम है जो हमारे बच्चों के भविष्य को स्वस्थ बनाने में मदद कर रहा है। पेट के कीड़े न केवल बच्चों के शारीरिक विकास को रोकते हैं, बल्कि उनकी पढ़ाई और मानसिक विकास पर भी बुरा असर डालते हैं। बच्चों मे कृमि संक्रमण हुआ है या नहीं ये उनमे कुछ लक्षणों से पहचान जा सकता है, जिनमे से कुछ नीचे लिखे हैं –
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पेट में लगातार दर्द या बेचैनी।
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बहुत भूख लगना या भूख बिल्कुल न लगना।
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वजन का अचानक गिरना या न बढ़ना।
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हमेशा थकान और कमजोरी महसूस होना।
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जी मिचलाना या दस्त होना।
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सोते समय दांत किटकिटाना या गुदा द्वार (Anus) के आसपास खुजली होना।
National Deworming Day 2026: कृमि संक्रमण कैसे फैलता है?
कृमि संक्रमण या पेट में कीड़े होना एक ऐसी स्थिति है, जिसमें परजीवी कीड़े इंसान की आंतों में रहकर अपना पोषण प्राप्त करते हैं। ये कीड़े बच्चों के शरीर से जरूरी पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे बच्चा कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) का शिकार हो जाता है। कृमि संक्रमण मुख्य रूप से स्वच्छता की कमी के कारण फैलता है। इसके फैलने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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संक्रमित मिट्टी के संपर्क में आना: संक्रमित व्यक्ति के मल में कीड़ों के अंडे होते हैं। जब कोई खुले में शौच करता है, तो ये अंडे मिट्टी में मिल जाते हैं। जिनके संपर्क मे आने वाले बच्चे मे संक्रमण का खतरा हो जाता है।
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गंदे हाथों से खाना: मिट्टी में खेलने के बाद यदि बच्चे बिना साबुन से हाथ धोए कुछ खाते हैं, तो अंडे शरीर के अंदर चले जाते हैं।
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बिना धुली सब्जियां और फल: मिट्टी में मौजूद कृमि के अंडे अक्सर फल और सब्जियों चिपक जाते हैं। इन्हें बिना धोए खाने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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नंगे पैर चलना: हुकवर्म (Hookworm) जैसे कीड़ों के लार्वा नंगे पैर की त्वचा के जरिए सीधे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
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अशुद्ध पानी: दूषित पानी पीने से भी कीड़ों के अंडे पेट में पहुंच सकते हैं।
कृमि संक्रमण से बचने के प्रभावी उपाय-
हर साल की तरह इस वर्ष भी हम आपको National Deworming Day 2026 पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग कुछ बुनियादी आदतों को अपनाने की सलाह देते हैं, जिससे आपके बच्चे कृमि संक्रमण से बचे रहें, क्योंकि कृमि संक्रमण से ज्यादा खतरा बच्चों को ही है। इसलिए सभी माता पिता को अपने बच्चों को कॉमन रूप से कुछ safety tips देनी चाहिए जैसे-
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हाथों की सफाई: खाना खाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं।
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नाखून छोटे रखें: बच्चों के नाखून नियमित रूप से काटें, क्योंकि नाखूनों के अंदर गंदगी और अंडे जमा हो सकते हैं।
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साफ पानी का प्रयोग: हमेशा स्वच्छ और सुरक्षित पानी पिएं। पानी को उबालकर या फिल्टर करके पीना सबसे बेहतर है।
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फल और सब्जियों को धोएं: बाजार से लाए गए फल और सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
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जूते-चप्पल पहनें: बाहर खेलते समय या खेत में जाते समय हमेशा जूते या चप्पल पहनें।
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खुले में शौच न करें: हमेशा साफ शौचालय का उपयोग करें और आसपास स्वच्छता बनाए रखें।
कृमि संक्रमण का उपचार कैसे करें
कृमि संक्रमण से बच्चों को बचाने के लिए Albendazole की गोली खिलाई जाती है। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन यदि बच्चा पहले से बीमार है, तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे दें। 10 फरवरी के दिन स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को अल्बेंडाजोल (Albendazole) की गोली खिलाई जाती है।
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1-2 साल के बच्चों के लिए: आधी गोली (200mg) पीसकर पानी के साथ।
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2-19 साल के बच्चों के लिए: एक पूरी गोली (400mg) चबाकर खानी होती है।
National Deworming Day भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के स्वस्थ भविष्य की नींव है। स्वच्छता अपनाकर और समय पर कृमि मुक्ति की दवा लेकर हम कृमि संक्रमण को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। याद रखें, एक स्वस्थ बच्चा ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करता है। 2015 से अब तक 35 करोड़ से अधिक बच्चों को दवा दी जा चुकी है। भारत के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह कार्यक्रम चलता है। 11 लाख से अधिक स्कूल और 8 लाख आंगनवाड़ी केंद्र इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं।