विश्व हिंदी दिवस 2024- इतिहास और महत्त्व

विश्व हिंदी दिवस 2024

विश्व हिंदी दिवस 2024– स्वागत है दोस्तों आप सभी का ज्ञान दुनिया पर. आज विश्व हिंदी दिवस 2024 के अवसर पर हम भारतीय समाज के लिए hindi के महत्त्व पर और विश्व हिंदी दिवस के इतिहास पर चर्चा करेंगे. भारतीय समाज के लिए हिंदी भाषा न केवल बोलचाल की भाषा है बल्कि ये हमारी आत्मा की गहराई से निकलने वाली भाषा है. इससे हम अपनी ह्रदय की गहराई से लोगों के साथ जुड़ सकते हैं.

विश्व हिंदी दिवस 2024- इतिहास

विश्व में हिन्दी भाषा की स्थिति पर विचार करने और इसे दुनिया की अन्य भाषाओँ की तरह प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से साल 1975 में 10 जनवरी को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया था। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मलेन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। तब से अब तक भारत समेत पोर्ट लुईस, स्पेन, लंदन, अमेरिका, अफ्रीका जैसे देशों में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा चुका है.

10 जनवरी, 1975 को नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन की 31वीं वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित समारोह में वर्ष 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाने की घोषणा की थी। इसी साल 2006 में ही भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहली बार world hindi day मनाया था। वर्ष 2018 में मॉरीशस के पोर्ट लुइस में विश्व हिंदी सचिवालय भवन का उद्घाटन किया गया।

विश्व हिंदी दिवस 2024 की थीम क्या है

विश्व हिंदी दिवस 2024 की थीम

हर साल की  तरह इस बार भी विश्व हिंदी दिवस 2024 के लिए एक थीम का निर्धारण किया गया है. हिंदी दिवस के लिए इस बार थीम “हिंदी – पारंपरिक ज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को जोड़ना” रखी गई है. इस थीम का उद्देश्य hindi भाषा को हिंदी के पारम्परिक स्वरुप के साथ साथ आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ना है, ताकि टेक्नोलॉजी की दौड़ में हिंदी अन्य भाषाओँ से पीछे ना रह जाये. साथ ही समाज के लिए AI (Artificial intelligence) के साथ English के साथ साथ हिंदी के साथ भी सामंजस्य बैठना सुलभ हो.

विश्व हिंदी दिवस 2024- महत्त्व

हिंदी भारत के उत्तरी भाग और दुनिया भर में अनेक देशों में बड़े पैमाने पर बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। भारत के अलावा मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद, टोबैगो और नेपाल जैसे देशों में हिंदी भाषा बोली जाती है। मंदारिन और अंग्रेजी के बाद हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक देश में करीब 43.63 फीसदी लोग हिंदी का इस्तेमाल करते हैं, जबकि दुनिया भर में 60 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी भाषा बोलते हैं।

विश्व हिंदी दिवस मनाने का मुख्या उद्देश्य देश में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना और लोगों से अपने भाषणों, प्रदर्शनों, संगीत और थिएटर कलाओं में हिंदी को शामिल करने का आग्रह करना है। इसका उद्देश्य न केवल भारत के अन्दर बल्कि विदेशों में भी रह रहे भारतीयों को अपनी मातृभाषा हिंदी के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करना है.

हिंदी के विकास का इतिहास

हिन्दी भाषा अपने वर्तमान स्वरूप में विभिन्न अवस्थाओं से गुजरते हुए पहुंची है, जिसके दौरान इसे अन्य नामों से जाना जाता था। पुरानी हिंदी का सबसे प्रारंभिक रूप अपभ्रंश था। 400 ईस्वी में कालिदास ने अपभ्रंश में विक्रमोर्वशियम नामक एक रोमांटिक नाटक लिखा। आधुनिक देवनागरी लिपि 11वीं शताब्दी में अस्तित्त्व में आई। हिंदी भाषा के विकास का इतिहास 1000 वर्षों का है जिसका अध्ययन हमने तीन चरणों – आदिकाल, मध्यकाल तथा आधुनिककाल के अंतर्गत किया है।

सामान्यतः प्राकृत की अन्तिम अपभ्रंश अवस्था से ही हिन्दी साहित्य का आविर्भाव स्वीकार किया जाता है। उस समय अपभ्रंश के कई रूप थे और उनमें सातवीं-आठवीं शताब्दी से ही ‘पद्य’ रचना प्रारम्भ हो गयी थी। यह निर्णय करना सरल नहीं है कि ‘हिन्दी’ शब्द का प्रयोग इस भाषा के लिए कब और किस देश में प्रारम्भ हुआ। हाँ, इतना अवश्य कहा जा सकता है कि प्रारम्भ में ‘हिन्दी’ शब्द का प्रयोग विदेशी मुसलमानों ने किया था। इस शब्द से उनका तात्पर्य ‘भारतीय भाषा’ का था।

हिन्‍दी भाषा के विकास में सन् 1800 में अंग्रेजों द्वारा स्‍थापित फोर्ट विलियम कॉलेज, कोलकाता का अहम योगदान है। कॉलेज के हिंदुस्‍तानी विभाग में पहली बार हिन्‍दी में अच्‍छे अनुवाद किये गए जिससे हिन्‍दी गद्य का स्‍वरूप बनने लगा। इसके बाद हिंदी के प्रेमियों में अपने देश के लिए एक उच्च कोटि की भावना जगी।

 

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