स्ट्रैट ऑफ होर्मुज किसको जोड़ता है? जानिए क्यों चर्चा मे है स्ट्रैट ऑफ होर्मुज

जानिए क्यों चर्चा मे है स्ट्रैट ऑफ होर्मुज

स्ट्रैट ऑफ होर्मुज किसको जोड़ता है? यह सवाल अक्सर तब चर्चा में आता है जब दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ती हैं या मध्य पूर्व में तनाव की खबरें सामने आती हैं। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज या होर्मुज जलडमरूमध्य, जिसे अंग्रेज़ी में Strait of Hormuz कहा जाता है, विश्व की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री जलधाराओं में से एक है। यह न केवल दो समुद्री क्षेत्रों को जोड़ता है, बल्कि वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति का सबसे महत्त्वपूर्ण मार्ग होने के कारण  वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धड़कन भी माना जाता है।

जब से अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर हमला करके ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई को मार दिया है तो ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है। हालांकि अभी ये बंदी केवल अमेरिकी और इजराइली जहाजों के लिए है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि यह जलडमरूमध्य किन देशों और समुद्रों को जोड़ता है, और क्यों यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार में इतनी बड़ी भूमिका निभाता है। भौगोलिक और रणनीतिक रूप से इसकी स्थिति ऐसी है कि यह पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को नियंत्रित करता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य किसको जोड़ता है?

होर्मुज जलडमरूमध्य एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है जो मध्य पूर्व में स्थित है। यह लगभग 55 से 95 किलोमीटर चौड़ा है और सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई लगभग 21  मील (लगभग 34 किमी) है। जबकि इसकी लंबाई 161 किमी(100 मील) है। हालांकि जहाजों के लिए आने जाने वाले रास्ते की चौड़ाई केवल 3 किमी है।

यह जलडमरूमध्य दो प्रमुख समुद्री क्षेत्रों को जोड़ता है:- फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman)

इसके माध्यम से फारस की खाड़ी का पानी अरब सागर और आगे हिंद महासागर तक पहुंचता है। इसके उत्तर में ईरान की सीमा लगती है, जबकि दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित हैं। तेल के निर्यात की दृष्टि से यह जलडमरु बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इराक़, क़तर तथा ईरान जैसे देशों का तेल निर्यात यहीं से होता है।

क्यों महत्त्वपूर्ण है स्ट्रैट ऑफ होर्मुज

यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्ग हैजिससे हर साल लगभग 20-25% वैश्विक तेल व्यापार गुजरता है। भारत की भी तेल आपूर्ति का लगभग 50% इसी स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) से होता है। इसका मतलब है कि अगर यहां कोई बाधा आती है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। भारत मे भी स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पेट्रोल- डीजल की कीमतों मे 10 से 12 रुपए की वृद्धि हो सकती है।

क्यों चर्चा मे है स्ट्रैट ऑफ होर्मुज

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खुला रहना चाहिए। इसके बावजूद, क्षेत्रीय तनाव के कारण कभी-कभी जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो जाती है। जब भी ईरान की मिडिल ईस्ट देशों या इज़राइल और अमेरिका से तनाव बढ़ता है तो ईरान इस स्ट्रैट को बंद करने की धमकी देता रहा है। और फिलहाल ईरान पर इज़राइल-अमेरिकी हमले के बाद से ईरान ने अमेरिकी जहाजों के लिए स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है।

इस वजह से विश्व पटल पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के महत्त्व पर चर्चा तेज हो गई है और साथ ही दुनिया का ध्यान अब इस दिशा मे भी जाना चाहिए कि भविष्य मे ऐसी स्थिति ने निपटने के लिए दुनिया को इस स्ट्रैट ऑफ होर्मुज का विकल्प तलाशना होगा ताकि संघर्ष या तनाव की स्थिति मे ईरान या इस स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के आस पास के देश यहाँ से होने वाले आवागमन को प्रभावित न कर सकें।

अवश्य पढ़ें– Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) क्या है? इसके बंद होने से क्यों बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें?

दुनिया के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) का लगभग 21% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यह मार्ग ज्यादा समय तक बंद होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की भारी कमी हो जाएगी। जिससे कच्चे तेल की कीमतों मे भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

भारत मे भी तेल कंपनियां तेल की कीमतों मे वृद्धि कर सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। यहाँ जरा सी भी हलचल भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को सीधे प्रभावित करती है। भारत की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 50% आयात इसी स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से होता है।

स्ट्रैट ऑफ होर्मुज का इतिहास

प्राचीन इतिहास में भी यह जलमार्ग व्यापार और सामरिक नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण रहा है। प्राचीन काल से ही यह जलमार्ग दुनिया की महान सभ्यताओं के बीच व्यापार और शक्ति का सेतु रहा है उस काल मे यह मसालों और रेशम के व्यापार का हिस्सा था। भारत और चीन के माध्यम से बहुत अधिक मात्रा मे व्यापार इस स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के माध्यम से होता रहा है। औपनिवेशिक काल में यूरोपीय शक्तियों ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण पाने की कोशिश की। पर इस स्ट्रैट का महत्त्व खाड़ी देशों मे तेल की खोज के कारण और आधुनिक युग में तेल के उपयोग के कारण इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है।

सुमेरियन (मेसोपोटामिया) और सिंधु घाटी सभ्यता (India) के बीच समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होता था। प्राचीन ग्रंथों में ‘मगन’ (संभवतः ओमान) और ‘मेलुहा’ (सिंधु क्षेत्र) के बीच व्यापारिक जहाजों का जिक्र मिलता है, जो हॉर्मुज से होकर गुजरते थे। उस समय यहाँ से तांबा, कीमती पत्थर, हाथीदांत और मसालों का व्यापार होता था।

 

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