विश्व सामाजिक न्याय दिवस (World Social Justice Day) हर साल 20 फरवरी को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह दिन सामाजिक न्याय, समानता, गरीबी उन्मूलन और मानवाधिकारों के महत्व को रेखांकित करने के लिए समर्पित है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ‘सामाजिक न्याय’ का वास्तविक अर्थ क्या है? सरल शब्दों में कहें तो एक ऐसा समाज जहाँ किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी जाति, धर्म, लिंग, रंग या संस्कृति के आधार पर भेदभाव न हो, वही सामाजिक न्याय है।
Gyan Duniya पर आज के इस लेख में हम जानेंगे कि इस दिवस की शुरुआत कब हुई, 2026 की थीम क्या है और भारत के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक न्याय की क्या अहमियत है?
विश्व सामाजिक न्याय दिवस का इतिहास
सामाजिक न्याय की आवश्यकता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 2007 में विश्व सामाजिक न्याय दिवस को मनाने की घोषणा की थी। इसके बाद 2009 से इसे पूरे विश्व में आधिकारिक रूप से मनाया जाने लगा। इसका मुख्य उद्देश्य गरीबी, बेरोजगारी, मानवाधिकारों के हनन और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना है। पहली बार सामाजिक न्याय जैसे विषय पर वर्ष 1995 मे चर्चा हुई थी। 1995 मे विश्व सामाजिक विकास शिखर सम्मेलन (World Summit for Social Development) कोपेनहेगन में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में गरीबी उन्मूलन, पूर्ण रोजगार और सामाजिक एकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
26 नवंबर 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाने के लिए कोई दिन निश्चित करने के लिए प्रस्ताव पारित किया। हालांकि पहली बार दुनिया भर मे विश्व सामाजिक न्याय दिवस 20 फरवरी 2009 को मनाया गया था।
World Social Justice Day का महत्त्व
संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस की स्थापना इसलिए की ताकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय सामाजिक न्याय के महत्व को समझे और गरीबी, लैंगिक असमानता, बेरोजगारी, मानवाधिकारों के हनन और सामाजिक बहिष्करण जैसी समस्याओं का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाए। विश्व सामाजिक न्याय दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह याद दिलाने का अवसर है कि हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ हर व्यक्ति सम्मान के साथ जी सके। शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे हम भेदभाव की बेड़ियों को तोड़ सकते हैं।
दुनिया में अभी भी करोड़ों लोग गरीबी में जीवन बिता रहे हैं। गरीबी केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय का मुद्दा है और ये केवल एक क्षेत्र/महाद्वीप या देश का विषय नहीं है बल्कि ये पूरी दुनिया मे सामान्य बात है। भारत जैसे विकासशील देश मे तो World Social Justice Day का महत्त्व और बढ़ जाता है। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने Social Justice को लोकतंत्र की नींव माना था।
विश्व सामाजिक न्याय दिवस 2026 की थीम
हर साल संयुक्त राष्ट्र World Social Justice Day के लिए एक विशेष थीम (Theme) निर्धारित करता है और पूरे वर्ष उस विशेष थीम के तहत दुनिया भर मे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष 2026 के लिए थीम निर्धारित की है – “Empowering Inclusion: Bridging Gaps for Social Justice (समावेशन को सशक्त बनाना: सामाजिक न्याय के लिए दूरियों को पाटना)”
यह थीम इस बात पर जोर देती है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में शामिल किए बिना न्याय अधूरा है। यह थीम समावेशी नीतियों और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित है।
वर्तमान में सामाजिक न्याय से जुड़े मुख्य मुद्दे
आज की दुनिया में सामाजिक न्याय से जुड़ी कई चुनौतियां हैं:
- आय की असमानता: अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार बढ़ रही है।
- बेरोजगारी: खासकर युवाओं में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है।
- जलवायु परिवर्तन: गरीब देश और समुदाय जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
- शिक्षा में असमानता: सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही है।
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी: गरीब लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी महंगी और दुर्गम हैं।
- प्रवासन और शरणार्थी संकट: लाखों लोग युद्ध, गरीबी और जलवायु परिवर्तन के कारण विस्थापित हो रहे हैं।
- डिजिटल विभाजन: सभी के पास इंटरनेट और डिजिटल तकनीक की पहुंच नहीं है।
- भेदभाव: जाति, धर्म, लिंग, यौन अभिविन्यास आदि के आधार पर भेदभाव अभी भी जारी है।
