हर साल 28 फरवरी को भारत में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस -National Science Day गर्व के साथ मनाया जाता है। यह दिन न केवल हमारे वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम को सम्मान देने का है, बल्कि नई पीढ़ी में जिज्ञासा और नवाचार- Innovation की लौ जगाने का भी है। विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। यह हमारे जीवन के हर हिस्से में मौजूद है। दवाइयों से लेकर मोबाइल फोन तक, उपग्रहों से लेकर हरित क्रांति तक, भारत ने विज्ञान के हर क्षेत्र में अद्भुत प्रगति की है।
वर्ष 2026 में हम एक ऐसे समय में खड़े हैं जहाँ भारत ‘विकसित भारत’ के सपने को विज्ञान और तकनीक के जरिए हकीकत में बदल रहा है। आज जब दुनिया तेजी से डिजिटल होती जिंदगी की रेस मे तेजी से आगे बढ़ रही है, पूरी दुनिया इस समय क्रांतिकारी Innovation Artificial Intelligence (AI) के बढ़ते प्रभावों और उपयोगों को समझने मे लगी है, भारत ने भी हाल ही मे दिल्ली मे AI Summit का आयोजन करके दुनिया को दिखा दिया कि भारत भी नई तकनीकों को अपनाने मे पीछे नहीं है।
और जब बात विज्ञान और तकनीक की हो तो भारतीय नोबेल प्राइज़ विजेता डॉ. सी. वी. रमन की बात न हो तो इस लेख की चर्चा बेमानी लगती है। इसलिए आज 28 फरवरी के अवसर पर National Science Day के महत्व, सर सी.वी. रमन के ऐतिहासिक योगदान और भारत की वर्तमान वैज्ञानिक ताकत के बारे में चर्चा करते हैं।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस(National Science Day) मनाने का मुख्य उद्देश्य 28 फरवरी 1928 को भारतीय भौतिक विज्ञानी सर सी.वी. रमन द्वारा की गई ‘रमन प्रभाव’ (Raman Effect) की खोज को याद करना है। 1928 में उन्होंने प्रकाश के व्यवहार पर शोध करते हुए रमन प्रभाव की खोज की। यह खोज आज भी रसायन विज्ञान, भौतिकी और चिकित्सा अनुसंधान में उपयोगी है।
भारत सरकार ने 1986 में राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार परिषद (NCSTC) के सुझाव पर 28 फरवरी को इस विशेष दिवस के रूप में घोषित किया था। इस खोज के लिए सर सी.वी. रमन को 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो किसी भी भारतीय (और एशियाई) के लिए विज्ञान के क्षेत्र में पहला नोबेल था।
‘रमन प्रभाव’ क्या है?
सर सी.वी. रमन ने यह साबित किया था कि जब प्रकाश की किरण किसी पारदर्शी माध्यम (जैसे तरल या ठोस) से गुजरती है, तो उसके रंग (तरंगदैर्घ्य) में बदलाव आता है। यह प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of Light) के कारण होता है। जब प्रकाश की किरण किसी तरल या ठोस पदार्थ से गुजरती है, तो अधिकांश प्रकाश सीधे निकल जाता है, लेकिन कुछ प्रकाश अणुओं से टकराकर अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाता है। इस बिखरे प्रकाश में कुछ किरणों की ऊर्जा (और रंग) बदल जाती है। यही रमन प्रभाव है।
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महत्व: इस खोज ने दुनिया को यह समझने में मदद की कि समुद्र का पानी नीला क्यों दिखता है।
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उपयोग: आज ‘रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी’ का उपयोग कैंसर के इलाज, नशीले पदार्थों की पहचान, और अंतरिक्ष विज्ञान में अणुओं की संरचना समझने के लिए पूरी दुनिया में किया जा रहा है।
National Science Day- वर्तमान मे भारत में विज्ञान द्वारा हासिल की गई कुछ उपलब्धियां
आज का भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने विज्ञान के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक मुकाम हासिल किए हैं। अंतरिक्ष के क्षेत्र मे तो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान सस्थान – इसरो ने हाल के कुछ वर्षों मे अनेक बड़ी उपलब्धियां हासिल की है। जैसे-
अंतरिक्ष में परचम: चंद्रयान और आदित्य-L1
इसरो (ISRO) ने चंद्रयान-3 की सफलता के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला दुनिया का पहला देश बनकर इतिहास रचा। इसके बाद आदित्य-L1 मिशन ने सूरज के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ाए। 2026 तक भारत अपने महत्वाकांक्षी ‘गगनयान’ मिशन के जरिए इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में है।
डिजिटल इंडिया और एआई (AI) का विकास
भारत आज दुनिया में सबसे तेज़ डिजिटल भुगतान (UPI) वाला देश है। इसके साथ ही, भारत अब Artificial Intelligence (AI) और Quantum Computing में अपनी पकड़ मज़बूत कर रहा है। कृषि से लेकर स्वास्थ्य तक, एआई का उपयोग भारतीय वैज्ञानिकों की प्राथमिकता है। हाल ही मे देश मे AI के प्रभावों पर चर्चा करने और भविष्य मे इसके उपयोग को लेकर चर्चा करने के लिए दिल्ली मे AI Summit का आयोजन हुआ था, जिसमे देश और दुनिया के अनेक टेक दिग्गज और राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए थे जिसमे से फ्रांस के राष्ट्रपति की मौजूदगी इस समिट के महत्त्व को और बढ़ा दी थी।
वैक्सीन और स्वास्थ्य तकनीक
कोविड-19 के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ के जरिए भारत ने दुनिया की मदद की। आज भारत जेनेरिक दवाओं और उन्नत जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) का वैश्विक केंद्र (Global Hub) बन गया है।
ऐसे ही न जाने कितनी वैज्ञानिक खोजें हुई है हाल के वर्षों मे जिनकी चर्चा इस प्लेटफॉर्म पर करना संभव नहीं है। हालांकि कुछ खास वैज्ञानिक खोजों मे देश की कुछ संस्थाएं अग्रणी हैं, जैसे डीआरडीओ और हिंदुस्तान आएरोनोटिक्स लिमिटेड HAL ने देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया है। आज हम देश मे बनी मिसाइलों के निर्यात की दिशा मे तेजी से आगे बढ़ रहें हैं।
परमाणु शक्ति मे आत्मनिर्भरता
भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर देशों में से एक है। 22 परमाणु रिएक्टर सफलतापूर्वक चल रहे हैं। डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने 1948 में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की नींव रखी थी। थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा में भारत अग्रणी है। भारत ने 1974 मे पहली बार परमाणु परीक्षण करने का प्रयास किया था पर वास्तव मे भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न होने मे कुछ वक्त लगा।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के मार्गदर्शन में हुए इन परीक्षणों ने भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता को मजबूत किया। 11 और 13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में किए गए पांच सफल भूमिगत परमाणु परीक्षणों की एक श्रृंखला थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में, भारत ने खुद को परमाणु हथियार संपन्न देश घोषित किया।
कृषि विज्ञान
हरित क्रांति – डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में भारत खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बना।
श्वेत क्रांति – दूध उत्पादन में भारत विश्व में पहले स्थान पर
जैव प्रौद्योगिकी से बेहतर बीजों का विकास
सटीक कृषि (Precision Farming) में नई तकनीकें
