जानिए कब से हुई थी National Deworming Day की शुरुआत?

National Deworming Day 2026

National Deworming Day यानी राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस भारत में हर साल 10 फरवरी को मनाया जाता है। यह दिवस बच्चों और किशोरों को पेट के कीड़ों (Worm/कृमि) से मुक्त करने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम है। पेट में कीड़े होना एक आम समस्या है जो खासकर बच्चों को प्रभावित करती है। ये कीड़े बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शैक्षिक विकास पर बुरा प्रभाव डालते हैं। इसी समस्या को देखते हुए भारत सरकार ने National Deworming Day की शुरुआत की थी।

National Deworming Day शुरू करने का उद्देश्य क्या था?

National Deworming Day भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाया जाने वाला एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। इस अभियान के तहत 1 से 19 वर्ष की आयु के सभी बच्चों और किशोरों को मुफ्त में कृमि नाशक दवा – Albendazole दी जाती है।

यह कार्यक्रम स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से संचालित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को मिट्टी द्वारा संचारित कृमि संक्रमण (Soil-Transmitted Helminths) से बचाना है। एक डाटा के मुताबिक भारत में लगभग 24 करोड़ बच्चे कृमि संक्रमण के खतरे में हैं। National Deworming Day के माध्यम से इन सभी बच्चों तक दवा पहुंचाई जाती है।

National Deworming Day की शुरुआत कब हुई?

National Deworming Day की शुरुआत 10 फरवरी 2015 को हुई थी। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशों पर आधारित है। WHO के अनुसार, ऐसे क्षेत्रों में जहां 20% या इससे अधिक बच्चे कृमि संक्रमण से प्रभावित हों, वहां सामूहिक कृमि नाशक दवा देने की जरूरत होती है। भारत में यह कार्यक्रम शुरू होने के बाद से अब तक करोड़ों बच्चों को लाभ मिल चुका है। यह दुनिया का सबसे बड़ा कृमि मुक्ति कार्यक्रम है।

कृमि संक्रमण के नुकसान:

  1. पोषण की कमी: पेट के कीड़े बच्चों के शरीर से पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे कुपोषण होता है।
  2. खून की कमी (एनीमिया): कुछ कीड़े आंतों से खून चूसते हैं, जिससे एनीमिया हो जाता है।
  3. शारीरिक विकास में बाधा: कृमि संक्रमण से बच्चों की लंबाई और वजन ठीक से नहीं बढ़ता।
  4. मानसिक विकास पर असर: पोषण की कमी से बच्चों का मानसिक विकास धीमा हो जाता है।
  5. स्कूल में उपस्थिति कम होना: बीमार रहने की वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पाते।
  6. पढ़ाई में ध्यान लगना: कमजोरी और बीमारी के कारण बच्चे पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पाते।

National Deworming अभियान कैसे काम करता है?

कृमि मुक्ति अभियान वैसे तो वर्ष 2015 से देश भर मे समय समय पर विभिन्न स्थानों पर स्थानीय प्रक्षाशन या सरकार द्वारा चलाया जाता रहा है पर National Deworming Day के दिन विशेष अभियान चलाकर देश भर मे विभिन्न संस्थानो, स्थानीय प्रशासन या सरकार द्वारा दवा वितरण किया जाता है।

सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों द्वारा बच्चों को दवा दी जाती है। 1 से 5 साल के बच्चों को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता दवा देते हैं। जो बच्चे स्कूल या आंगनवाड़ी नहीं जाते, उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा दी जाती है। मुख्य दिवस के 15 दिन बाद एक और दिन होता है जिसमें छूटे हुए बच्चों को दवा दी जाती है।

दवा के बारे में:

दवा का नाम: Albendazole (400 mg) की एक गोली। यह दवा पूरी तरह से सुरक्षित है और WHO द्वारा अनुमोदित है। इस दवा के कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। बहुत कम बच्चों में हल्का पेट दर्द, मतली या चक्कर आ सकता है जो अपने आप ठीक हो जाता है।

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